योजनाओं से करदाताओं के धन की बर्बादी न करे सरकार

हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी कल्याणकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं होने पर बुधवार को उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने शहरों में रहनेवाले बेघरों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्र की पैरवी कर रहे एडिशन सालिसीटर जनरल आत्माराम नाडकर्णी को कहा कि आप अच्छी योजनायें लेकर आते हैं किन्तु उन पर अमल नहीं कर सकते तो ऐसे योजनाओं को बनाते ही क्यों हैं। कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि केन्द्र यह नहीं कह सकता कि उसने राज्यों को धन उपलब्ध करा दिया है और इसके आगे राज्य जानें।
केन्द्र सरकार हजारों करोड़ रुपये योजनाओं में खर्च कर रही हैं जिसका सदुपयोग दूसरे महत्वपूर्ण कार्यो के लिये भी किया जा सकता है। यह स्पष्टतया करदाताओं के धन की बर्बादी है जो क्षुब्ध करने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने अपने दलील में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार बेघरों के लिये घर उपलब्ध कराने की जगह गायों के लिये गौशालाओं की चिंता कर रही है तो उत्तरदाता के वकील ने आपत्ति करते हुए कहा कि इसमें राजनीति मत घुसेडिये।

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