राज्य अलंकरण समारोह : राज्योत्सव में राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होंगे प्रदेश के 18 नागरिक: पांच संस्थाओं को भी किया जाएगा सम्मानित

रायपुर, 04 नवम्बर 2017, राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद कल पांच नवम्बर को नया रायपुर में आयोजित पांच दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2017 के समापन समारोह में 18 नागरिकों और 5 संस्थाओं को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में दी जा रही उनकी सर्वश्रेष्ठ सेवाओं के लिए राज्य अलंकरणों से सम्मानित करेंगे। ये अलंकरण महान विभूतियों के नाम पर स्थापित किए गए हैं। समारोह शाम 6 बजे शुरू होगा। राज्यपाल श्री बलरामजी दास टंडन की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और विधानसभा अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल सम्मानित विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्रिगण, सांसद, विधायक और अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। राज्य अलंकरण समारोह की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है।
इस वर्ष राज्योत्सव में जिन पांच संस्थाओं को पुरस्कृत किया जा रहा है, उनमें ग्राम हथनीकला (जिला मुंगेली) स्थित संत भक्ति पंथी कल्याण समिति को सामाजिक चेतना और सामाजिक न्याय के लिए गुरू घासीदास सम्मान, ग्राम सरगांव (जिला मुंगेली) स्थित बिल्हा सहकारी विपणन संस्था को सहकारिता के क्षेत्र में ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान, राजधानी रायपुर के श्री दूधाधारी मठ को दानशीलता, सौहार्द्र और अनुकरणीय सहायता के लिए दानवीर भामाशाह सम्मान और रिसाली (भिलाई नगर) की संस्था बहुददेश्यीय जनजागरण सेवा समिति को आदिवासियों की सेवा और उत्थान के लिए डॉ. भंवर सिंह पोर्ते सम्मान से नवाजा जाएगा। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ मितानिन संस्था को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्र में पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान से विभूषित किया जाएगा। समारोह में विभिन्न अलंकरणों से विभूषित होने वाले नागरिकों और संस्थाओं का परिचय इस प्रकार है:-

पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान

जनसम्पर्क विभाग की ओर से पंडित माधव राव सप्रे स्मृति राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान वर्ष 2016 के लिए वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ. हिमांशु द्विवेदी को दिया जा रहा है।

डॉ. हिमांशु द्विवेदी
डॉ. हिमांशु द्विवेदी पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। समसामयिक विषयों पर सजीव रिर्पोटिंग में उन्हें महारत हासिल है। उनका जन्म 4 मार्च 1973 ग् वालियर (मध्यप्रदेश) में हुआ। उन्होंने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर और पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरूआत वर्ष 1990 में 17 वर्ष की उम्र में ग्वालियर के दैनिक ‘‘आज’’ से की। इसके बाद उन्होंने कई प्रमुख समाचार पत्रों में सम्पादकीय दायित्वों का निर्वहन किया। डॉ. द्विवेदी सामाजिक-सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों पर निरंतर लेखन कार्य कर रहे हैं । वे इन विषयों के ओजस्वी वक्ता भी हैं। वर्ष 1995 मंे डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने देश के सर्वश्रेष्ठ युवा वक्ता के रूप में चयनित होकर जापान के 6 शहरों में भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर अपना प्रभावी व्याख्यान दिया। उनकी प्रकाशित किताबों में देश-विदेश के उनके यात्रा संस्मरणों पर आधारित पुस्तक ‘बहाव’ विशेष रूप से उल्लेखनीय है। डॉ. द्विवेदी वर्तमान में हिन्दी दैनिक हरिभूमि, रायपुर के प्रबंध संपादक का दायित्व संभाल रहे हैं।

चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार (प्रिंट मीडिया हिन्दी)

चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार (प्रिंट मीडिया हिन्दी) के लिए जनसम्पर्क विभाग की ओर से इस वर्ष वरिष्ठ पत्रकार श्री आसिफ इकबाल का चयन किया गया है।

श्री आसिफ इकबाल

श्री आसिफ इकबाल का जन्म 29 मई 1951 को रायपुर (छत्तीसगढ़) में हुआ। आपने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से वर्ष 1972 में बी-एस.सी. और वर्ष 1975 में एम.ए.-मनोविज्ञान तथा वर्ष 1976 में पत्रकारिता में बी.जे. की उपाधि प्राप्त की। आपने सक्रिय पत्रकारिता की शुरूआत वर्ष 1971 में की। आप रायपुर के दैनिक देशबंधु, महाकौशल, युगधर्म, अमृत संदेश, भास्कर, राजनांदगांव के सबेरा संकेत, दुर्ग के दैनिक अमर किरण, धमतरी और रायपुर के दैनिक प्रखर समाचार सहित कई समाचार पत्रों को सह-संपादक, संपादक आदि के रूप में अपनी सेवाएं दी। आपकी प्रकाशित कृतियांे में छत्तीसगढ़ की विभिन्न विधाओं के कलाकारों के इंटरव्यू पर आधारित पुस्तक ‘संस्कृति के प्रतिचिन्ह‘ (वर्ष 2004) और ‘सच व समय का दस्तावेज‘ (वर्ष 2016) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैे। श्री इकबाल की पुस्तक ‘सच व समय का दस्तावेज‘ में अपनी सुदीर्घ पत्रकारिता के दौरान उनके प्रकाशित प्रमुख समाचारों और आलेखों का सुरूचिपूर्ण संकलन है। वर्तमान में आप स्वतंत्र लेखन और स्वतंत्र पत्रकारिता में सक्रिय हैं।

चंदूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार
( इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी)

जनसम्पर्क विभाग की ओर से हिन्दी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में रचनात्मक योगदान के लिए चन्दूलाल चंद्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार इस वर्ष टेलीविजन पत्रकार श्री अवधेश मिश्रा को दिया जाएगा।

श्री अवधेश मिश्रा

श्री अवधेश मिश्रा का जन्म 7 अपै्रल 1984 को हुआ। श्री मिश्रा ने राजधानी रायपुर के दुर्गा महाविद्यालय से बी.का ॅम. करने के बाद जनसंचार विषय में प्रावीण्य सूची में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। श्री मिश्रा रायपुर में टेलीविजन न्यूज चैनल ई.टी.व्ही. के वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं। वे इस चैनल में हिन्दी और छत्तीसगढ़ी दोनों ही भाषाओं में एंकरिंग भी करते हैं। उन्हें पिं्रट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 9 वर्ष का अनुभव है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष रूप से बस्तर अंचल में शासकीय योजनाओं सहित कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग की है।

मधुखेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार (प्रिंट मीडिया अंग्रेजी)

श्री ई.व्ही. मुरली

अंग्रेजी प्रिंट मीडिया के अंतर्गत जनसम्पर्क विभाग की ओर से मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार इस वर्ष श्री ईव्ही मुरली को दिया जाएगा। श्री मुरली विगत वर्ष 2010 से लगातार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के अंग्रेजी दैनिक हितवाद के संपादक हैं। उन्होंने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्य़ालय, रायपुर से वर्ष 1989 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें अंग्रेजी पत्रकारिता का लंबा अनुभव है। विभिन्न सामाजिक और समसामयिक विषयों पर वे निरंतर लेखन कार्य कर रहे हैं।

शहीद वीरनारायण सिंह सम्मान
क्षेत्र: आदिवासी एवं पिछड़ा वर्ग का उत्थान आदिम जाति कल्याण विभाग

चयनित नागरिक – श्री घनश्याम सिंह ठाकुर

श्री घनश्याम सिंह ठाकुर का जन्म 3 नवम्बर 1954 को ग्राम तेन्दूभाठा पोस्ट केशतरा, तहसील साजा जिला बेमेतरा में हुआ। ग्रामीण क्षेत्र में रहते हुए कला साधना के क्षेत्र में उनका योगदान प्रशंसनीय है। आपके द्वारा बांस-बांसुरी बीन, मोहरी, मांदर, मंजीरा, नगाड़ा, तबला, हारमोनियम, करताल, तमूरा, चिकारा, दफरा, गुदुम, टिमकी-टासक, झूमका वादन किया जाता है। सन् 2005 में राष्ट्रपति पुरस्कार गणतंत्र दिवस दिल्ली में माननीय डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा, सन् 2014 में करमा में छ0ग0 शासन महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशीला साहू द्वारा सम्मानित, सन् 2014 राज्योत्सव रायपुर में संस्कृति मंत्री श्री अजय चंद्राकर द्वारा नगाड़ा वादन में सम्मानित है। छत्तीसगढ़ से भारत के कोने-कोने अपने संगीत यात्रा द्वारा अमिट छाप छोड़ी है। श्री ठाकुर साक्षरता कार्यक्रम के भी भागीरथी है, जिनके प्रयास से प्रौढ़ शिक्षा, साक्षरता मिशन का कला जत्था द्वारा समुचित क्रियान्वयन हुआ है। श्री ठाकुर छत्तीसगढ़ी करमा नृत्य के प्रशिक्षक हैं, जिसके लिए भी उन्हें पुरस्कृत किया गया है। लोक कला जत्था के माध्यम से सामाजिक, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के क्षेत्रो में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है।

शहीद गुण्डाधूर सम्मान
क्षेत्र: खेल
खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग

चयनित खिलाड़ी- कुमारी रेणुका यादव

कुमारी रेणुका यादव में खेल के प्रति दृढ़ इच्छा शक्ति तथा लक्ष्य की प्राप्ति की ओर निरंतर अग्रसर रहने की मौलिक प्रतिभा है। ओलम्पिक खेलों में भारतीय हॉकी दल का प्रतिनिधित्व करते हुए भाग लेकर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर, साउथ एशियन गेम्स में भारत का हॉकी में प्रतिनिधित्व करते हुए, स्वर्ण पदक प्राप्त करके, राज्य का गौरव बढ़ाया है।

मिनी माता सम्मान
क्षेत्र: महिला उत्थान
महिला एवं बाल विकास विभाग

चयनित सामाजिक कार्यकर्ता – श्रीमती गीता बंजारे

श्रीमती गीता बंजारे का जन्म 1 मई 1956 को हुआ। आपने महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत स्व-सहायता समूह ग िठत कर, उन्हंे आय उपार्जन गतिविधियों से जोड़ने, महिलाओं को साक्षर बनाने एवं जागृति लाने तथा निर्धन बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्यों के साथ-साथ बाल विवाह दहेज प्रथा के विरूद्ध में अभियान चलाया गया। आपके द्वारा दलितों में सामाजिक चेतना जागृत करने हेतु महिला सम्मेलन के माध्यम से गाँव-गाँव में जाकर जन चेतना जागृत करने समाज सेवा के माध्यम से दलित उत्थान तथा पीड़ित, शोषित लोगों को गाँव-गाँव में इकट्ठा कर नशाबंदी, दहेज प्रथा, अशिक्षा, परिवार नियोजन तथा साक्षरता एवं छुआछूत की भावना दूर करने के कार्य विगत 40 वर्षो से किया जा रहा है। आपको सामाजिक कार्यों के लिए विभिन्न स्तर पर सम्मानित किया गया है। आपको कला के क्षेत्र मंे भी सम्मान प्रदान किया गया है। आपने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु वर्ष में दो बार सुरता मिनीमाता महिला जागृति शिविर और संभाग एवं राज्य स्तरीय महिला सम्मेलन में प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया जिसमें अब तक लगभग 2500 से ज्यादा महिलाएँ लाभान्वित हो चुकी हैं। आपके द्वारा गरीब और बेसहारा बच्चों के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में अनुकरणीय पहल किया गया है।

गुरू घासीदास सम्मान
क्षेत्र: सामाजिक चेतना एवं सामाजिक न्याय
आदिम जाति कल्याण विभाग

चयनित संस्था – संत भक्ति पंथी कल्याण समिति, हथनीकला

‘संत भक्ति पंथी कल्याण समिति’ ग्राम-हथनीकला, पोस्ट-धरमपुरा, तहसील-पथरिया, जिला-मुंगेली द्वारा दलितों में सामाजिक चेतना जागृत करने हेतु पंथी नृत्य के माध्यम से गांव-गांव में जाकर जन चेतना जागृत करना तथा दलित उत्थान के कार्य को उन तक पहुँचाकर लाभ दिलाने का कार्य 25 वर्शों से किया जा रहा है। इनके द्वारा नशाबंदी, दहेज प्रथा, अशिक्षा, परिवार नियोजन, छुआ-छूत की भावना को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही शासकीय कार्य अंतर्गत कुष्ठ उन्मूलन, साक्षरता, पर्यावरण संरक्षण, पल्स पोलियो, आयोडीन युक्त नमक सेवन, विश्व जनसंख्या दिवस, बालविवाह, राष्ट्रीय मलेरिया रोधी जैसे अनेक कार्यों का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है।

ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान
क्षेत्र: सहकारिता
सहकारिता विभाग

चयनित संस्था – बिल्हा सहकारी विपणन संस्था मर्यादित, सरगांव जिला मुंगेली

इस सहकारी संस्था को वर्ष 2016 मंे सहकार भारती छत्तीसगढ़ से ‘‘सहकार रत्न’’ पुरस्कार प्रदान किया गया है। इस संस्था का कार्यक्षेत्र 02 जिलों बिलासपुर के विकासखण्ड बिल्हा एवं मुंगेली जिले की विकासखण्ड पथरिया के 156 ग्राम पंचायतों तक विस्तृत है। इस संस्था में कुल 5762 व्यक्तिगत एवं 20 सहकारी संस्थाएं सदस्य हैं। इस संस्था ने इफको/कृभको की सदस्यता ग्रहण की है। संस्था अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इफको/कृभको से रासायनिक खाद सीधे विपणन कर कृषकों को उचित मूल्य पर उपलब्ध कराती है। यह प्रतिवर्ष राशि रू. 300.00 लाख से अधिक का रासायनिक खाद का व्यवसाय करती है, जो अन्य विपणन सहकारी समितियों के लिए अनुकरणीय है। इसके अतिरिक्त संस्था के अंतर्गत 2600 मीट्रिक टन क्षमता के 05 गोदाम हैं। वर्तमान में संस्था की कार्यशील पूंजी राशि रू. 50 लाख है। यह संस्था किसी भी वित्तदायी संस्था अथवा राज्य शासन की व्यतिक्रमी नहीं है और लगातार लाभ अर्जित कर रही है। संस्था के उत्कृष्ट प्रबंधन के कारण संस्था के प्रबंधक को कृभको से ‘‘सहकार बन्धु ’’ पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। सहकारिता के क्षेत्र में संस्था का कार्य उत्कृष्ट, प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है।

हाजी हसन अली सम्मान
क्षेत्र: उर्दू भाषा की सेवा
आदिम जाति कल्याण विभाग

चयनित शायर – मोहम्मद सज्जाद अली (गौहर जमाली, शायर)

मोहम्मद सज्जाद अली का जन्म 20 अगस्त, 1943 में हुआ। स्कूल शिक्षा के समय से ही आपका रूझान शायरी की ओर बढ़ने लगा था। 1980 में उस्ताद शायर जनाब शारिक जमाल नागपुरी की शागिर्दगी में शायरी सीखने के बाद 1982 से आपने शायरी लिखना शुरू किया। आपकी पहली गजल ‘अखबार-ए-मशरिक’ कोलकाता में प्रकाशित हुई। आपकी शायरी , गजल, गीत, रूबाई, मुक्तक, दोहे, नात, हम्द आदि रचनाएं लगातार अखबार और पत्रिकाओं जिनमें तवाजुन सहमाही मालेगांव, साज-ए-सरमदी देहरादून, आसबाक पूना, सदा-ए-उर्दू भोपाल, अखबार-ए-मश्रिक कोलकाता, रंगो बू हैदराबाद, अखबार-ए-उड़ीसा कटक, महज-ए-अदब कटक, फनकार ग्वालियर, जहांगीर नागपुर, जर्री शुआयें बैंगलोर, ककसाड़-दिल्ली, चश्मा-ए-उर्दू रायपुर में प्रकाशित हुई। आपने सन् 2002 छत्तीसगढ़ उर्दू तंजीम कायम किया जिसके माध्यम से उर्दू का प्रचार-प्रसार और शेरी नशिस्त, काव्य गोष्ठी, उर्दू शायरों के रचनाओं की इस्लाह, फन-ए-शायरी की शिक्षा वर्तमान तक करते आ रहे हैं। उर्दू साहित्य सेवा के लिए आपको 2013 में ऑल इंडिया अफसांचा अकादमी, दिल्ली से ‘‘ताज-ए-अदब’’ का खिताब, 2008 में अभिव्यक्ति भाटापारा द्वारा ‘‘प्रशस्ति पत्र’’ और सम्मान’’, 2014 में छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य मंडल द्वारा ‘‘सारस्वत सम्मान’’, 2015 में छत्तीसगढ़ संकल्प समाज सेवी संस्थान द्वारा ‘‘संकल्प सम्मान’’ और 2017 में छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी रायपुर द्वारा ‘‘इतेखार-ए-अदब’’ के सम्मान से नवाजा गया।

महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव सम्मान
क्षेत्र: तीरंदाजी
खेल एवं युवा कल्याण विभाग

चयनित खिलाड़ी – श्री यशपाल ध्रुव

श्री यशपाल ध्रुव पिता श्री कुशाल सिंह तीरंदाजी की अभूतपूर्व प्रतिभा से संपन्न है। बिलासपुर जिले के एक छोटे से गांव शिवतराई तहसील कोटा में परंपरागत रूप से बाँस के धनुष-बाण के साथ खेलते-खेलते उन्होंने तीरं दाजी में एकलव्य के समान लगन, निष्ठा एवं कड़ी मेहनत करके प्रतिस्पर्धात्मक तीरंदाजी को सीखा है। श्री यशपाल ध्रुव ने दिनांक 8 से 11 अपै्रल 2016 में झारखंड में आयोजित ‘‘23वीं सीनियर नेशनल आरचरी चैम्पियनशिप‘‘ में स्वर्ण पदक अर्जित कर छत्तीसगढ़ राज्य को गौरवान्वित किया है।

पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान
क्षेत्र: सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक क्षेत्र में अभिनव प्रयत्न

सामान्य प्रशासन विभाग

चयनित संस्था – छत्तीसगढ़ मितानिन, छत्तीसगढ़

ग्रामीण जनसंख्या में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता लाने और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2002 में ‘मितानिन कार्यक्रम’ आरंभ किया गया। वर्तमान में प्रदेश की ग्रामीण बसाहटों और शहरी गरीब बस्तियों में 70,000 स्वयंसेवी महिलायें ‘मितानिन’ के रूप में स्थानीय समुदाय को सेवाएं दे रही हैं। उन्हें 21 चरणों का प्रशिक्षण प्राप्त है। आम जनता में स्वास्थ्य संबंधी समझ बढ़ाने, बीमारियों की रोकथाम करने, हितग्राहियों को स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर बीमारियों की पहचान और इलाज करने में मितानिनों का अहम् योगदान रहा है। साथ ही स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक विषयों जैसे- महिला सशक्तिकरण, पोषण व स्वच्छता में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। मितानिनों के योगदान से राज्य की शिशु मृत्यु दर 79 से कम होकर 39 प्रति 1000 तक आई है। गर्भवती व टीकाकरण की सेवाओं में चार गुना वृद्धि हुई है। मितानिन द्वारा समय पर इलाज से हर वर्ष मलेरिया, निमोनिया, दस्त आदि रोगांे से कई हजार जीवन बच रहे हैं।

राजा चक्रधर सिंह सम्मान
क्षेत्र: संगीत एवं कला
संस्कृति विभाग

चयनित संगीत शिल्पी – श्री मदन चौहान

संगीत के क्षेत्र में, तबला संगति के माध्यम से आपका पदार्पण हुआ। आप अजराड़ा घराने के ख्यातिलब्ध उस्ताद कालेखां के गंडाबंध शार्गिद रहे हैं। सन् 1975-80 के दौरान आकाशवाणी के लिए अनेक छत्तीसगढ़ी धुनें बनाईं। विविध भारती से आपके अनेक छत्तीसगढ़ी गीतों का प्रसारण होते रहे हैं। सुगम संगीत के अंतर्गत भजन तथा गज़ल गायकी के प्रतिष्ठित कलाकार हैं। सूफी परंपरा के गायन में आपकी साधना, उदारता और सहिष्णुता की भाव-धारा झलकती है। विगत तीन दशकों से छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओड़िशा, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में भी लोकप्रिय प्रस्तुतियों के लिये सम्मान सहित जाने जाते हैं। टी. सीरीज तथा बास सीरीज से आपके गीतों के एलबम विमोचित हुये हैं। विभिन्न संस्थाओं द्वारा आपको कला रत्न, सूफी तारीख, संगीत विभूति, दाऊ रामचंद्र देशमुख सम्मानों से विभूषित किया गया है। शास्त्रीय तथा उपशास्त्रीय सुगम संगीत के कलाकारों को प्रशिक्षित करने के साथ-साथ गायन के क्षेत्र में भी आपकी निरंतर सक्रिय भागीदारी बनी हुई है।

पंडित सुन्दरलाल शर्मा सम्मान
क्षेत्र: साहित्य/आंचलिक साहित्य
संस्कृति विभाग

चयनित कवि – डॉ. सुरेन्द्र दुबे

डॉ. सुरेन्द्र दुबे का जन्म छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित बेमेतरा में दिनांक 08.08.1953 को हुआ था। आपके द्वारा बी.ए.एम.एस. तथा अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधि अर्जित की गई है। शासकीय चिकित्सा सेवा में कार्यरत रहते हुये छत्तीसगढ़ी भाषा के कवि के रूप में आपकी छवि स्थापित है। वर्तमान में आप संस्कृति विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2010 में भारत सरकार द्वारा आपको पद्मश्री से अलंकृत किया गया है। आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के कार्यक्रमों में आप सम्मान सहित आमंत्रित किये जाते रहे हैं।

दाऊ मंदराजी सम्मान
क्षेत्र: लोककला/शिल्प
संस्कृति विभाग

चयनित लोक गायिका – श्रीमती कविता वासनिक

आपका जन्म 10 जुलाई 1962 को हुआ। सम्प्रति भारतीय स्टेट बैंक, राजनांदगांव में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की धारा में मात्र 10 वर्ष की आयु से सम्मिलित होकर क्रमशः जनजागृति को उद्देश्य बनाकर छत्तीसगढ़ लोक नाट्यों की मंचीय परंपरा ‘‘कारी’’ के माध्यम से गायिका के रूप में लोकमंच में पदार्पण किया। लुप्त प्रायः छत्तीसगढ़ी भजनों की शैली को पुर्नजीवित कर लोकमंचों में प्रस्तुत करने और राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत कार्यक्रमों में प्रमुख गायिका के रूप में आपकी पहचान स्थापित है।

डॉ. खूबचंद बघेल सम्मान
क्षेत्र: कृषि
कृषि विभाग

चयनित किसान – श्री रोहित कुमार साहू

आपका जन्म दिनांक 6 फरवरी, 1972 को ग्राम अचानकपुर, तहसील-पाटन, जिला दुर्ग के एक सामान्य कृषक परिवार में हुआ। आपने 1992 में पिपरौद (अभनपुर) से आई.टी.आई. करने के पश्चात् वर्ष 1994 से कृषि कार्य प्रारंभ कर दिया। कृषि कार्य करते हुए आपने उच्चतर शिक्षा पूर्ण की। आपने प्रगतिशील कृषकों एवं विभागीय अधिकारियों के संपर्क में रहते हुए अपनी परंपरागत कृषि को पूर्णतः आधुनिक कृषि में परिवर्तित कर लिया है और स्वयं के प्रक्षेत्र में जैविक कृषि आदानों का निर्माण कर जैविक खेती पर प्रयोग प्रारंभ कर चुके है। छत्तीसगढ़ की विलुप्तप्राय धान प्रजातियों के संरक्षण के क्षेत्र में किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिए ‘‘कृषि एवं सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार’’ द्वारा आपको ‘‘पादप जीनोम संरक्षक पुरस्कार’’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा जिला एवं राज्य स्तर पर भी अनेक पुरस्कार प्राप्त हुये हैं। आपने सरसों, गेहूं एवं कुसुम जैसी फसलों की ‘‘गहन उत्पादन की पद्धति’’ को बढ़ावा देने उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्तमान में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से सुगंधित धान के उत्पादन, प्रसंस्करण एवं स्वतः विपणन द्वारा साथी कृषकों को अधिकाधिक लाभ दिलाने प्रयासरत हैं।

महाराजा अग्रसेन सम्मान
क्षेत्र: सामाजिक समरसता
सामान्य प्रशासन विभाग

चयनित समाजसेवी – श्री सीताराम अग्रवाल

सामाजिक जीवन में जरूरतमंद गरीबों के लिए स्वास्थ्य शिविर, नेत्र शिविर, स्वास्थ्य हेतु डाईग्नोस्टिक सेंटर की स्थापना, सूरजपुर जिले में आदिवासी अचंल के गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा हेतु आर्थिक सहयोग तथा अािर्थक रूप से कमजोर स्कूली बच्चों को लेखन सामग्री उपलबध कराते हुए आदिवासी बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल का फीस भी दिया जा रहा है। ब्लाईंड बच्चों को काला चश्मा एवं डंडा वितरण, मूकबधिर को श्रवणयंत्र निःशुल्क उपलब्ध कराना, जरूरतमंद एवं गरीबों को निःशुल्क कंबल वितरण, अस्पताल में गरीबों को समय-समय पर खाद्य सामग्री वितरण किया जा रहा है। अनेक सेवा संस्थानों में विभिन्न पदांे पर रहते हुये सेवा प्रदान कर रहें है। मुख्यतः एम्स हास्पिटल रायपुर, वैश्य सेवा सोसायटी रायपुर, मानव सेवा समिति राजनांदगांव, महाराजा अग्रसेन सेवा समिति अंबिकापुर, महाराजा अग्रसेन सेवा संस्थान सूरजपुर, श्री मानव सेवा संस्थान नया रायपुर तथा श्री महाराजा अग्रसेन सेवा समिति रायगढ़ में स्थापित मंगल भवन के माध्यम से अनेक सेवा कार्य संपादित कर रहे हैं।

दानवीर भामा शाह सम्मान
क्षेत्र: दानशीलता सौहार्द्र एवं अनुकरणीय सहायता
समाज कल्याण विभाग

चयनित संस्था – श्री दूधाधारी मठ

श्री दूधाधारी मठ-रायपुर द्वारा रायपुर नगरवासियों को शुद्ध पेयजल प्रदान करने, ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा एवं प्रचार-प्रसार हेतु विद्या मंदिर योजना को सफल बनाने के लिए ग्राम-पिपरौद, जिला-रायपुर में 30 एकड़ कृषि योग्य भूमि को दान स्वरूप प्रदान किय ा गया है। संस्कृत महाविद्यालय के सुचारू संचालन तथा आर्थिक सक्षमता हेतु 101 कृषि योग्य भूमि ग्राम-छेरकापुर (बलौदाबाजार) को दी गई है। ग्राम-छड़िया, तहसील-पलारी में विधि महाविद्यालय बलौदाबाजार को 40 एकड़ कृषि योग्य भूमि दान में दी गई। श्री दूधाधारी मठ-रायपुर द्वारा धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं मांगलिक कार्य सम्पन्न कराने के लिए सत्संग भवन का निर्माण कराया गया। संस्कृत भाषा के प्रति संस्कृत पाठशाला एवं महाविद्यालय की स्थापना की गई। गोवंश को सरंक्षित करने हेतु श्री दूधाधारी मठ द्वारा अभनपुर, पिपरौद, बासीन, देवसुदरा, वटगन, ओड़ान, घुठिया, छेरकापुर, छड़िया, अमेठी, हिरमी, ठेलकी एवं पेडरी में पांच-पांच हजार से अधिक क्षमता वाली गौशाला का संचालन किया जा रहा है।

धन्वन्तरि सम्मान
क्षेत्र: आयुर्वेद चिकित्सा
स्वास्थ्य विभाग

चयनित चिकित्सक – डॉ. देवेन्द्र कुमार कटरिया

डॉ. देवेन्द्र कुमार कटरिया, पिता स्व. श्री शिवचंद कटरिया का जन्म 28 जून 1949 को ग्राम खम्हरिया, ब्लॉक-तिल्दा, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ। शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर से 1969 में बी.ए.एम.एस. आयुर्वेदाचार्य की उपाधि प्राप्त कर वैद्य प्रथम श्रेणी के पद पर, जनपद पंचायत बागबाहरा महासमुंद के ग्राम बकमा के आयुर्वेद औषधालय में नियुक्त हुये। वर्ष 1973 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित एवं शासकीय आयुर्वेद औषधालय नगपुरा में वैद्य प्रथम श्रेणी के पद पर तत्पश्चात व्याख्याता रस शास्त्र के पद पर 1975 को शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय रायपुर में हुई। वर्ष 1990 में पी.एच.डी. आयुर्वेद (काय चिकित्सा) की उपाधि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से प्राप्त कर शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर में 1985 को रीडर, एवं 1996 को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत हुए। छत्तीसगढ़ आयुष एवं स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रायपुर में वर्ष 2012 में आयुर्वेद संकायाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा तथा संकायाध्यक्ष यूनानी चिकित्सा पद्वति का कार्यभार संभाला। स्नातकोत्तर स्तर के 06 शोध प्रबंधों का निर्देशन तथा 01 स्नातकोत्तर एवं 01 पी.एच.डी. शोध प्रबंध का सह निर्देशन आपने किया है। अध्यापन कार्य के अतिरिक्त महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अधिकारी का कार्य संपादित किया। डॉ. कटारिया आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी एवं सिद्ध बोर्ड छत्तीसगढ़ में शासन द्वारा सदस्य नामित किए गए हैं। आप 2014 में शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, रायपुर के प्राचार्य पर से सेवा निवृत्त हुए।

बिलासा बाई केंवटिन सम्मान
क्षेत्र: मछली पालन
मत्स्य विभाग

श्री यशवंत कुमार केंवट

श्री यशवंत कुमार केंवट, पिता श्री नान्हू दाउ केंवट, ग्राम-झनकपुर, पोस्ट बरमकेला, विकास खण्ड बरमकेला, जिला रायगढ़ के निवासी हैं। आपने वर्ष 2016-17 में भारतीय मेजर कार्प प्रजाति के अतिरिक्त कॉमन कार्प, ग्रास कार्प, महासिर के 2700 लाख स्पॉन का उत्पादन एवं संवर्धन किया, और 1500 लाख मानक फ्राई एवं 50.00 लाख फिंगरलिंग मत्स्य बीज का उत्पादन किया। उक्त मत्स्य बीज के उत्पादन में आपने राशि रूपये 27.00 लाख का व्यय किया। आपने राशि रूपये 47.00 लाख मूल्य के मत्स्य बीज का विक्रय किया। इस प्रकार मत्स्य बीज के उत्पादन एवं संवर्धन से आपने राशि रूपये 20.00 लाख की शुद्ध आय अर्जित की। आपने मत्स्य बीज उत्पादन कार्य के साथ-साथ 17.00 हेक्टेयर जलक्षेत्र मेें मत्स्य पालन कार्य कर 70.00 मे0 टन मछली का उत्पादन किया, तथा मछली उत्पादन से राशि रूपये 12.00 लाख की शुद्ध आय अर्जित की। आपने प्रति हेक्टेयर 4.110 मे0 टन मछली का उत्पादन लिया। उक्त के अतिरिक्त आपने अपने प्रक्षेत्र में कृषि एवं उद्यानिकी कार्य से राशि रूपये 90,000/- (रू. नब्बे हजार) तथा कुक्कुट पालन कर राशि रूपये 40,000/- (रू. चालीस हजार) की अतिरिक्त आय अर्जित की।

संस्कृत भाषा सम्मान
क्षेत्र: संस्कृत भाषा के क्षेत्र में अनुसंधान एवं अध्ययन
उच्च शिक्षा विभाग

चयनित साहित्यकार – शकुन्तला शर्मा

संस्कृत, हिन्दी और छत्तीसगढ़ी की सशक्त हस्ताक्षर शकुन्तला शर्मा का जन्म बिलासपुर जिला के कोसला ग्राम जो कि वर्तमान में जांजगीर -चॉपा जिले में 12 जुलाई, 1949 को हुआ। आपने एम.ए. (संस्कृति, हिन्दी) की उपाधि के साथ-साथ बी.एड. एवं सिद्धांतालंकार की उपाधि भी प्राप्त किया। आपने साहित्य जीवन की यात्रा में धर्मिता में भारतवर्ष हमारा है नामक शीर्षक से प्रसिद्ध कविता का सृजन किया। संस्कृति ग्रंथ की अनुवादित रचनाओं में अभिज्ञान शकुन्तलम्, कठोपनिषद, रघुवंश, चाणक्य नीति, विदुर नीति, ऋगवेद, आदि का पद्यानुवाद कार्य भी सम्पादित किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी रचनाओं में चंदा के छांव, बोसला, करगा, बूढ़मरय नहकौनीदय, चन्दल कलस गोरमाटी, कुमार संभव जैसे कविता संग्रह, गजल संग्रह, गीत एवं महाकाव्यों पर भी विद्वतापूर्ण लेखन कार्य किया गया। आपके द्वारा हिन्दी भाषा के विविध भाषाओं को भी स्पर्श किया। अस्तु ढाई आखर, लय सम्प्रेषण, भारत स्वाभिमान, बेटी बचाओं जैसे मानवतावादी एवं मर्मस्पर्शी पहलूओं पर भी अपनी लेखनी चलाई। सम्प्रति इन कार्यों ने इन्हें विभिन्न अलंकरणों जैसे संस्कृत भाषा के क्षेत्र में 19 अंलकरणों एवं क्रीड़ा के क्षेत्र में अनेक सम्मान एवं पुरस्कार अर्जित किये।

पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान
क्षेत्र: अपराध अनुसंधान के क्षेत्र में
पुलिस विभाग

चयनित पुलिस निरीक्षक – श्री संजय पुंढीर

श्री संजय पुंढीर का जन्म 06 फरवरी, 1963 को दिल्ली शहर में साधारण परिवार में श्री गजेन्द्र सिंह पुंढीर के घर में हुआ, जो देना बैंक में कार्यरत थे। श्री पुंढीर की प्राथमिक शिक्षा जिला रायपुर के आरंग में हुई तथा हायर सेकेण्डरी की शिक्षा बहुद्देश्यीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुर्ग में हुई है एवं बी.एस.सी. (बायोलाजी) की शिक्षा दुर्ग कॉलेज से प्राप्त की। तत्पश्चात् एम.ए. की पढ़ाई सेंट जोन कॉलेज आगरा से की गई। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान उ प निरीक्षक की सीधी भर्ती में रायपुर जिला से चयनित होकर वर्ष 1990-91 में पुलिस विभाग में नियुक्त होकर बुनियादी प्रशिक्षण सागर पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में उप निरीक्षक का प्रशिक्षण कर प्रथम पदस्थापना जिला खरगौन के थाना सेंधवा में परिवीक्षाधीन पद पर तैनात रहे है। वर्ष 1991 में ओझर चौंकी थाना नांगड़वाड़ी का स्वतंत्र प्रभार मिला। इस तरह 04 वर्ष तक जिला खरगौन में पदस्थ रहे तथा वर्ष 1994 में छत्तीसगढ़ क्षेत्र के राजनांदगांव जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ रहे। पूरे सेवाकाल में उन्हें कुल 201 पुरस्कार मिले हैं, जिनमें सेवा पुस्तिका में प्रशंसा एवं नगद पुरस्कार शामिल है। उनका सेवा रिकार्ड भी अच्छा हैं।

डॉ. भंवर सिंह पोर्ते सम्मान
क्षेत्र: आदिवासियों की सेवा और उत्थान
आदिम जाति कल्याण विभाग

चयनित संस्था – बहुद्देशीय जनजागरण सेवा समिति रिसाली भिलाई

संस्था द्वारा आदिवासी संस्कृति, कला, भाषा के उन्नयन, उत्थान तथा विगत 10 वर्शो से 09 दिसम्बर विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय आदिवासी सम्मेलन एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन। शहीद वीर नारायण सिंह के जन्म एवं शहादत दिवस के अवसर पर प्रतिवर्श सर्व आदिवासी समाज को एक मंच पर लाने के लिए एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों में जनजागृति लाने हेतु करमा त्यौहार युवा सम्मेलन, सामाजिक महिलाओं को जागृत करने हेतु महिला सम्मेलन, लोक कला प्रशिक्षण शिविर, लोक कला महोत्सव का आयोजन। अनुसूचित जनजाति के लोगों को सही दिशा में जोड़ने एवं शहीद वीर नारायण के सपनों को साकार करने के उद्देश्य से सामाजिक रीति, नीति, खेल, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण आदि क्षेत्रों में आगे बढ़ने वाले गरीब व बेसहारा बच्चों के साथ शाला त्यागी छात्र-छात्राओं को निःशुल्क टयूशन देकर शिक्षा के प्रति जोड़ना। आदिवासी समाज को एकसूत्र में पिरोने व उपर उठाने हेतु गरीब परिवारों के घर दुःख की घड़ी में उसके यहां निःशुल्क टेंट, दरी, पानी, ड्रम चाय नाश्ता आदि जरूरी सामान एवं आर्थिक सहयोग प्रदान करने का कार्य करते है।

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