बागवानी और पशुपालन से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए: डॉ. रमन सिंह

  • मुख्यमंत्री से नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक ने की मुलाकात
  • केलो, खारंग और मनियारी सिंचाई परियोजनाओं के लिए नाबार्ड ने स्वीकृत की 715 करोड़ की धनराशि
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गोदामों के निर्माण के लिए नाबार्ड देगा 25 करोड़ रूपए का ऋण
  • बाड़ी विकास परियोजना से अब तक 55 हजार से अधिक आदिवासी परिवार लाभान्वित
  • इस वर्ष 50 बाड़ियों को विकसित करने का लक्ष्य

रायपुर, 10 अगस्त 2017. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से आज यहां उनके निवास कार्यालय में राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के मुख्य महाप्रबंधक श्री एन.पी. महापात्रा ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने नाबार्ड के माध्यम से छत्तीसगढ़ के कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए दी जा रही सहायता के संबंध में मुख्यमंत्री को जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान कहा कि बागवानी और पशुपालन के क्षेत्र से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए, तो किसानों की आय दोगुनी करने के कार्यक्रम में काफी सहायता मिल सकती है।



श्री महापात्रा ने मुख्यमंत्री को बताया कि नाबार्ड द्वारा छत्तीसगढ़ की तीन बड़ी सिंचाई परियोजनााओं केलो, खारंग और मनियारी सिंचाई परियोजनाओं के लिए 715 करोड़ रूपए की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के पूरे होने पर परियोजना क्षेत्र में लगभग एक लाख 29 हजार 630 हेक्टेयर के रकबे में सिंचाई क्षमता विकसित की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री को श्री महापात्रा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में ग्रामीण क्षेत्रों में भंडार गृहों (गोदाम) के निर्माण के लिए 25 करोड़ रूपए की राशि आवंटित की गई है। इसके पहले भी नाबार्ड़ द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 54 गोदामों के निर्माण के लिए 68 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई थी, जिससे तीन लाख मीटरिक टन की भंडार क्षमता निर्मित होगी। बाडी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत दंतेवाड़ा, रायगढ़ और जशपुर जिले में किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रूपए के मान से अनुदान सहायता दी गई है। इस वर्ष नाबार्ड द्वारा 50 बाड़ियों के माध्यम से 25 हजार आदिवासी परिवारों को सहायता देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य के 18 जिलों में 79 बाड़ी विकास परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसके अंतर्गत 55 हजार 716 आदिवासी परिवार लाभान्वित होंगे। इन परियोजनाओं के लिए दो अरब 55 करोड़ रूपए की सहायता दी गई है।



मुख्यमंत्री को उन्होंने बताया कि नाबार्ड द्वारा कृषि उत्पादक संगठनों (एफ.पी.ओ.) को प्रोत्साहित करने के लिए भी सहायता दी जा रही है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत धमतरी में छह कृषक उत्पादक संगठनों को अपने उत्पाद सीधे बेचने के लिए दुकान आवंटित की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में ऐसे 150 कृषक उत्पादक संगठनों को सहायता प्रदान करने का लक्ष्य नाबार्ड द्वारा तय किया गया है। किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य दिलाने, औन-पौने दामों में बिक्री को रोकने और बिचौलियों को कृषि उत्पादों की बिक्री से दूर रखकर किसानों को उनकी उपज का बेहतर लाभ दिलाने के लिए इस योजना के लिए नाबार्ड द्वारा सहायता दी जा रही है। आधारभूत सुविधा विकास कार्यक्रम के अंतर्गत नाबार्ड द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी को ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइन के विस्तार, विद्युत उपकेन्द्रों की स्थापना के लिए 902 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है।
नाबार्ड द्वारा खाद्य प्रसंस्करण नीति के अंतर्गत फूड पार्क विकसित करने के लिए भी सहायता दी जा रही है। श्री महापात्र ने बताया कि नाबार्ड द्वारा राज्य के 14 जिलों के 4500 गांवों में पानी के संरक्षण और संवर्धन तथा इसके बेहतर उपयोग के संबंध में ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया गया। किसानों को डेयरी विकास कार्यक्रम के माध्यम से सहायता देने के लिए नाबार्ड द्वारा कामधेनु विश्वविद्यालय के सहयोग से कार्य योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से चर्चा के दौरान कहा कि बागवानी और पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है। इस अवसर पर नाबार्ड के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक श्री शरद झा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।


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