वर्तमान समय चौतरफा संकट काल समय

मुखौटों का सच विमोचित
रायपुर । वरिष्ठ पत्रकार रमेश नैयर और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ सुरेंद्र अहलूवालिया की जुगलबंदी में लिखित व्यंग्य संग्रह मुखौटों के सच का विमोचन दिल्ली के सुप्रसिद्ध लेखक किशन कालजयी और अन्य अतिथियों ने किया। मुख्य अतिथि किशन कालजयी ने कहा कि व्यंग्य समाज की ज़रुरत है। आज का समय चौतरफा संकट का समय है, इसलिए लेखक को खुलकर लिखना चाहिए।
प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत डा आलोक शुक्ल, डा मंजुला श्रीवास्तव, अशोक शर्मा, अमित पटेल, आदि ने किया। छत्तीसगढ़ मित्र द्वारा आयोजित इस समीक्षा गोष्ठी में प्रबंध संपादक डॉ सुधीर शर्मा ने स्वागत भाषण दिया और कहा कि लतीफ घोंघी और ईश्वर शर्मा की तर्ज पर यह जुगलबंदी हुई है। किशन कालजयी ने अनेक उदाहरणों से व्यंग्य की महत्ता को सिद्ध किया। समारोह के अध्यक्ष डा सुशील त्रिवेदी ने कहा कि लेखक अपने लेखन से जाना जाता है, अपने पेशे से नहीं। पालि प्राकृत के जमाने से है। 
दमन दीव से पधारे डा विक्रम सिंघल ने कहा कि ऐसे अनेक चरित्रों का सच व्यंग्यकारों ने किया है। आज ओढे हुए चरित्र की समाज में बहुलता है। व्यंग्यकार डा स्नेहलता पाठक ने इस संग्रह पर कहा कि व्यंग्य का स्वभाव है समाज के लिए नया सोचना। कथनी और करनी में आज बहुत अंतराल आ गया है। व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि रमेश नैयर एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी हैं। समकालीन साहित्य में व्यंग्य केंद्र में है। व्यंग्य  का तत्व रचना में व्यापक प्रभाव डालती है। इन रचनाओं में कथा का सुंदर उपयोग किया गया है। डॉ महेंद्र ठाकुर ने कहा कि व्यंग्य लिखना सीमा में पदस्थ सिपाही के काम जैसा है। व्यंग्यकार खतरों से खेलते हैं। परितोष चक्रवर्ती ने कहा कि जो चुभे लेकिन आहत न करे, वह श्रेष्ठ व्यंग्य है। आज का समय धारदार व्यंग्य लेखन का समय है। डॉ सुरेंद्र अहलूवालिया ने कुत्ता और आदमी नामक व्यंग्य निबंध क्या पाठ किया। लेखक रमेश नैयर ने कहा कि पत्रकार और लेखक कबीर की तरह हैं, तमाम जोखिम उन्हें उठाना पड़ता है। व्यंग्य समाज में समानता लाता है।
समारोह में लेखक तेजिंदर, डा चित्तरंजन कर, डा आलोक शुक्ल, हर्ष श्रीवास्तव, डा मंजुला श्रीवास्तव, डा सुभद्रा राठोर, उर्मिला उर्मि,सुरेश पंडा, डा डी के पाठक, रूपिंदर तिवारी, रवि गहलोत, आसिफ इकबाल, शुभ्रा मिश्र, सोहनलाल लोधी, डा चौरसिया, आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन अजय अवस्थी किरण ने, आभार व्यक्त किया डा चित्तरंजन कर ने किया। 
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About Sanjeeva Tiwari

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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