कृषि मंत्री श्री अग्रवाल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक सम्पन्न


  • तीन लाख अऋणी किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा 
  • योजना के तहत बीमा कराने के निर्देश
  • किसानों को समय पर खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए
  •  मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड जारी करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम

रायपुर, 16 जून 2017/ कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने चालू खरीफ मौसम में लगभग तीन लाख अऋणी किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने के निर्देश  विभागीय अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने यहां आयोजित खरीफ 2017 कृषि आदान व्यवस्था समीक्षा बैठक में कहा कि प्रत्येक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी को 100 अऋणी किसानों का बीमा कराने लक्ष्य दिया जाए। यह बैठक यहां राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (समेती) के सभाकक्ष में आयोजित की गई। श्री अग्रवाल ने बैठक में कहा कि हर साल बड़ी संख्या में अऋणी किसान बीमा योजनाओं के दायरे में आने से छूट जाते हैं। केन्द्र सरकार द्वारा अधिक से अधिक किसानों को खेती-किसानी को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीमा योजना शुरू की गई है। इस साल भी पिछले साल की तरह खरीफ मौसम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई है। कृषि मंत्री ने बैठक में किसानों को दी गई कृषि आदान सामग्री की कृषक अंशराशि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से वसूल कर 30 जून तक अनिवार्य रूप से संबंधित संस्थाओं को जमा कराने के निर्देश दिए। 
बैठक में कृषि विभाग के सचिव श्री अनूप श्रीवास्तव, संचालक कृषि श्री एम.एस. केरकेट्टा, प्रबंध संचालक बीज एवं कृषि विकास निगम श्री आलोक अवस्थी, प्रबंध संचालक बीज प्रमाणीकरण संस्था श्री ए.बी. आसना, संयुक्त सचिव कृषि श्री के.सी. पैकरा, राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (समेती) के संचालक श्री एस.आर. वर्मा सहित प्रदेश के सभी जिलों के कृषि विभाग के उप संचालक और संभागीय मुख्यालयों के संयुक्त संचालक उपस्थित थे। 
श्री अग्रवाल ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों को उन्नत तरीके से खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। इसके लिए जिलों के प्रभारी अधिकारी अपने ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की हर सप्ताह बैठक लेकर नियमित समीक्षा करें। किसानों को आधुनिक तौर-तरीके से खेती करने के लिए समझाने में किसान मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। किसान मित्रों की भी हर तीन माह में बैठक लेकर उनके काम-काज की समीक्षा की जाए। श्री अग्रवाल ने किसानों को उनकी जमीनों के स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने की योजना की समीक्षा के दौरान कहा कि प्रथम चरण में कार्ड वितरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो गया है। द्वितीय चरण में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्ड वितरित करने पूरी तैयारी की जाए। 
श्री अग्रवाल ने बैठक में किसानों को मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण की प्रगति की समीक्षा भी की। अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में किसानों को अब तक 48 लाख से ज्यादा मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष लगभग 40 लाख 70 हजार मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में 12 लाख ऋणी किसान फसल बीमा योजना में शामिल हैं। 
श्री अग्रवाल ने जैविक खेती मिशन के तहत चयनित पांच जिलों दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और गरियाबंद तथा अन्य शेष जिलों के एक-एक विकासखण्डों को पूर्ण जैविक बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करके किसानों को पूर्णतः जैविक कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित जिलों में पहले से बने नडेप टांका और वर्मी टांका की मरम्मत कराकर जैविक खाद तैयार करने के लिए तत्परता से कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि इन जिलों में जिला स्तर पर समिति गठित कर जैविक खेती मिशन के क्रियान्वयन की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए। 
कृषि मंत्री ने बैठक में खरीफ मौसम 2017 के लिए खाद, बीज और मिनीकिट की व्यवस्था आदि के बारे में अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सभी सहकारी समितियों में दलहन मिनीकिट का भण्डारण कर किसानों को जरूरतों के अनुरूप वितरित कराने के निर्देश दिए। श्री अग्रवाल ने कहा कि किसानों को खेतों के मेड़ों में दलहन लगाने के लिए बीज मिनीकिट उपलब्ध कराने में प्राथमिकता दी जाए। इससे दलहन फसलों के विस्तार की योजना में अच्छी प्रगति होगी। कृषि मंत्री ने सौर सुजला योजना के अंतर्गत एक, तीन और पांच हार्स पावर के पम्प के लिए एसी कनेक्शन की बजाय डीसी कनेक्शन लेने के निर्देश अधिकारियों को दिए। 
श्री अग्रवाल ने बैठक में केन्द्र सरकार की कृषि विकास योजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने बैठक में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा फसल अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए किए गए आर्थिक दण्ड के प्रावधान की चर्चा करते हुए कहा कि इसका व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। इसके साथ ही कृषि सेवा केन्द्रों को एक-एक बेलर मशीन रखने के लिए अतिरिक्त अनुदान देने के निर्देश दिए। बेलर मशीन से खेतों में पड़े फसल अवशेषों को बांधकर बोझा बनाया जाता है। श्री अग्रवाल ने कहा कि मैदानी स्तर पर कृषि विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की होती है। ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की काम-काज की नियमित समीक्षा जिले के प्रभारी अधिकारियों द्वारा नियमित रूप से की जानी चाहिए। 
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About Sanjeeva Tiwari

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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