रबी मौसम में लगभग 65 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में दहलनी फसलों की संभावनाओं पर काम शुरू


  • एक दिवसीय कार्यशाला में किया गया विचार-विमर्श
  • अध्ययन रिपोर्टो पर भी हुई चर्चा


रायपुर, 16 जून 2017/ छत्तीसगढ़ में रबी मौसम में लगभग 65 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में दलहनी फसलों की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। यह ऐसा रकबा है, जहां रबी फसल बोई नहीं जाती है। इन संभावनाओं पर विचार-विमर्श करने राज्य शासन के कृषि विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के संयुक्त तत्वावधान में यहां राज्य कृषि प्रबंधन, विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों के कृषि विभाग के उप संचालक और संभागीय मुख्यालयों के संयुक्त संचालक कृषि शामिल हुए। 
कार्यशाला में बताया गया कि भारत सरकार के कृषि एवं कल्याण मंत्रालय के अधीन महलानोबिस फसल पूर्वानुमान केन्द्र नई दिल्ली तथा राष्ट्रीय रिमोट सेसिंग संस्थान हैदराबाद द्वारा भारत के छह राज्यों की पड़ती भूमि पर दलहली फसलों को बढ़ावा देने की संभावनाओं का अध्ययन किया गया। इनमें छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं। छत्तीसगढ़ में लगभग 15 लाख हेक्टेयर में रबी फसल लगायी जाती है। प्रदेश में रबी मौसम में करीब 65 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त रकबे में दलहनी फसल लेने की संभावनाओं पर व्यापक रिपोर्ट बनायी गयी है। 
कार्यशाला में दलहनी फसल विस्तार के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया। राष्ट्रीय रिमोट सेसिंग संस्थान हैदराबाद के डॉ. सी.एस.मूर्ति ने बताया कि अध्ययन रिपोर्ट में गांव, तहसील व जिला स्तर पर पड़त भूमि वाले क्षेत्रों में दलहनी फसलांे की संभावनाओं को अंकित किया गया है। कार्यशाला में वैज्ञानिक सुश्री ममता कुमारी ने जी.आई.एस. तथा सेटेलाईट से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से विभिन्न पैरामीटर के आधार पर प्राप्त परिणामों के बारे में बताया गया। इसी प्रकार भुवन पोर्टल के जरिए आगामी रबी मौसम के लिए नियोजन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गयी। 
कृषि मौसम विज्ञान इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. जी.के.दास ने कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की वर्तमान स्थिति तथा पड़त क्षेत्रों में दलहनी और तिलहनी फसलों की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। राज्य कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (समेती) के संचालक श्री एस.आर.वर्मा तथा संचालक कृषि श्री एम.एस.केरकेट्टा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में दलहनी और तिलहनी फसलों के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना बनायी गयी है। इसमें रबी मौसम में अरहर तथा तिवरा का रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 
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About Sanjeeva Tiwari

ठेठ छत्तीसगढ़िया. इंटरनेट में 2007 से सक्रिय. छत्तीसगढ़ी भाषा की पहली वेब मैग्‍जीन और न्‍यूज पोर्टल का संपादक. पेशे से फक्‍कड़ वकील ऎसे से ब्लॉगर.
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